परमात्मा ऊर्जा का केंद्र है, ऊर्जा के प्रवाह को पुनः ऊर्जा के केंद्र तक ले जाना ही योग है – प्रो0 डी के सिंह

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शोधपीठ मे योग कार्यशाला

एनआईआई ब्यूरो

गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय स्थित महायोगी गुरु श्री गोरक्षनाथ शोधपीठ द्वारा कुलपति प्रो0 पूनम टण्डन के संरक्षण में दिनांक 17 दिसम्बर को सप्तदिवसीय शीतकालीन योग कार्यशाला विषय ’योग का विज्ञान’ का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला 23 दिसम्बर तक चलेगा। कार्यक्रम का शुभारम्भ कार्यक्रम के मुख्य वक्ता दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राणि विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो0 दिनेश कुमार सिंह एवं शोधपीठ के उप निदेशक डा0 कुशलनाथ मिश्र द्वारा गुरु गोरक्षनाथ के चित्र पर पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। शोधपीठ के उप निदेशक डा0 कुशलनाथ मिश्र के द्वारा एक प्रस्ताविकी के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की गई।

इस कार्यशाला मे सबसे पहले योग के विज्ञान विषय पर प्राणि विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो0 दिनेश कुमार सिंह का व्याख्यान हुआ। प्रो. सिंह ने सृष्टि विषयक वैदिक सिद्धांतों की माडर्न साइंस के एटोमिक, न्यूक्लियर, क्वांटम एवं यूनिफाइड फिल्ड के साथ तुलना किया। उन्होंने कहा कि परमात्मा ऊर्जा का केंद्र है। उस परमात्मा से ऊर्जा का प्रवाह हो रहा है। उस ऊर्जा के प्रवाह को पुनः ऊर्जा के केंद्र तक ले जाना ही योग है।
उन्होंने यौगिक क्रियाओं के समकालीन पाश्चात्य वैज्ञानिकों विशेषकर क्वांटम वैज्ञानिकों के अध्ययन पर प्रकाश डाला। उन्होंने योग के टरमिनॉलजी का माडर्न क्वांटम फीजिक्स के टरमीनोलॉजी से तुलना किया। उन्होंने बताया कि योग के अभ्यास से चिकित्सीय खर्च कम हो जाता है। उन्होंने कहा कि योग पर जितना काम बाहर हुआ है उतना काम अपने यहाँ नहीं हुआ है। उन्होंने आशा व्यक्त किया कि यह शोधपीठ योग के क्षेत्र मे महत्त्वपूर्ण कार्य करेगा।

शोधपीठ के कार्यशाला मे दिया गया योग प्रशिक्षण

इस कार्यशाला में एक योग प्रशिक्षण का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। योग प्रशिक्षण योग प्रशिक्षक डा. विनय कुमार मल्ल के द्वारा दिया गया। इस प्रशिक्षण के द्वारा एक शोध अध्ययन भी किया जाना है जिसमे योग का लोगों पर पड़े शारीरिक एवं मानसिक प्रभाव का अध्ययन शामिल है। इस कार्य हेतु योग प्रशिक्षण में पंजीकृत लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। स्वास्थ्य परीक्षण मे ब्लड प्रेशर, पल्स, वजन आदि पैरामीटर सम्मिलित है। योग प्रशिक्षण में लगभग 80 लोगों ने भाग लिया। जिसमे एन. एस. एस., योग एवं स्नातक, परास्नातक, शोध छात्र आदि विद्यार्थी एवं अन्य लोग सम्मिलित हुए।

इस कार्यशाला में विश्वविद्यालय के शिक्षकों सहित शोधपीठ के रिसर्च एसोसिएट डा० सुनील कुमार तथा शोध अध्येता हर्षवर्धन सिंह, , कुंवर रणंजय सिंह, प्रिया सिंह उपस्थित रहे। गोरक्षनाथ शोधपीठ की सहायक निदेशिका डा0 सोनल सिंह द्वारा इस कार्यक्रम का संचालन एवं सहायक ग्रन्थालयी डा0 मनोज कमार द्विवेदी द्वारा मुख्य वक्ता एवं प्रशिक्षक सहित समस्त श्रोताओं को धन्यवाद ज्ञापित किया गया। इस कार्यशाला का फेसबुक लाइव प्रसारण किया गया।

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